Tuesday, March 15, 2011

सुरक्षित गोस्वामी
आध्यात्मिक गुरु

क्या मेरे जीवन में हमेशा दुख ही दुख रहेगा?
-एक पाठक

एक राजा ने अपने जन्मदिन पर सबको बुलाया। सब गिफ्ट लेकर आए, एक गिफ्ट में पर्ची पर लिखा था 'यह भी गुजर जाएगा'। राजा को गुस्सा आया कि पूरा राज्य खुशी मना रहा है और यह ऐसे बोलता है। राजा ने उसे बुलाकर जेल में डलवा दिया। कुछ दिन बीते, पड़ोसी राजा ने इस राजा पर हमला कर इसको बंदी बनाया और राज्य पर कब्जा कर लिया। अब जेल में बंद राजा बड़ा दुखी था। अचानक उसे याद आया 'यह भी गुजर जाएगा'। इस बात से राजा को दिलासा मिला, कुछ महीनों बाद राज्य की प्रजा ने आक्रमणकारी राजा पर हमला कर उसे हराया और अपने राजा को छुड़ा लिया। तब राजा को 'यह भी गुजर जाएगा' का मंत्र अच्छी तरह पक्का हो गया और उसने मंत्र देनेवाले को अपना सलाहकार नियुक्त कर दिया।

हम भी सुख या दुख, लाभ या हानि, मान या अपमान, जिस भी अवस्था में होते हैं, उसको हमेशा रहने वाला मान लेते हैं और यही असत्य में सत्य का विचार दुख पैदा करता है। दुख में लगता है कि हमेशा दुख रहेगा और सुख में लगता है कि हमेशा सुख रहेगा। परिवर्तनशील संसार में कुछ भी स्थिर नहीं रहता। सब बदलने वाला है। न कभी कुछ ठहरा है, न कभी कुछ ठहरेगा।

सब कुछ पहले से ही बीता हुआ है, इसीलिए कृष्ण कहते हैं - हे अर्जुन! ये सब मरे पड़े हैं। कुदरत से बनी हर चीज बदलती रहती है। यह शरीर भी कुदरत से बना है, इसलिए यह भी बदलता रहता है। कहा गया है 'क्या मांगूं कुछ थिर नाहि' यानी संसार में ऐसा कुछ भी नहीं, जो हमेशा एक जैसा रहे। अगर कुछ हमेशा रहने वाला है तो वह है हमारी चेतना, जिसको आत्मा कहते हैं। इसी को जानकर आदमी जीते जी हर पल मुक्त और आनंद भाव में रह सकता है।

2 comments:

अन्तर सोहिल said...

सुन्दर प्रेरक कथा
पढवाने के लिये आभार

प्रणाम स्वीकार करें

Manpreet Kaur said...

बहुत ही अच्छा पोस्ट है ! हवे अ गुड डे
मेरे ब्लॉग पर आए !
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